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शासकीय ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय अपनी स्थापना से ही विन्ध्य-प्रदेश की शैक्षणिक, सांस्कृतिक गतिविधियों की पराकाष्ठा का केन्द्र रहा है। कितने-कितने विद्वान, विद्यार्थी, राजनेता, प्रशासक यहॉं की गलियों में बड़े हुए, बड़े बने, यहॉं के क्रीड़ांगन से ऊर्जा बटोरी, यहॉं की प्रयोगशालाओं और कक्षाओं में ज्ञान और व्यवहार के अमूल्य सूत्र पाये, जीवन भर उस धरोहर से आनंदित होते रहे और दूसरों में आनन्द बॉंटते रहे। इस महाविद्यालय का एक गौरवशाली अतीत रहा है। उम्र की बात करें तो यह इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ज्यादा ठहरता है, डॉ हरी सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर इसके लिये अनुजवत् है और अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय रीवा तो उम्र के हिसाब से इसका बच्चा है। इस महाविद्यालय ने इतिहास बनते देखा है, मूर्तियों को भगवान बनते देखा है, रंगों को कालजयी पोट्रेट बनते पाया है।

 

अतीत का आनंदोत्सव मनाना ही हमारा लक्ष्य नहीं है, पर उपलब्धियों का हर्ष स्वाभाविक है। यह महाविद्यालय छात्र बनाने का कोई कल-कारखाना नहीं है बल्कि संवेदनाओं की बहती हुई नदी है, जिसका कंकर भी संस्कारों में तप कर शंकर बन जाता है। यहॉं कल्पनाओं की तूलिका से वे सजीव चित्र रचे जाते हैं जिन पर वान गाग, पाबलो पिकासो या मकबूल फिदा हुसैन और रज़ा को भी रश्क हो सकता है। यह आदमी बनाने की प्रयोगषाला है।

 

यह सच है कि बीच में इसके रथ के पहिये डगमगाने लगे थे, अंजर-पंजर चरमराने लगे थे और निहित स्वार्थों की कुण्ठा आचरण की कमी और इच्छाशक्ति की कमजोरी के चलते यहॉं का वातावरण प्रदूषित होने लगा था जिससे इस महाविद्यालय की छवि भी प्रभावित हो रही थी। यह केवल परीक्षा केन्द्र बन चुका था।

 

पर सन् 2006 से ठाकुर रणमत सिंह महाविद्यालय में एक नया सूरज जागा, नए संकल्प का, एक नई रोशनी आयी और महाविद्यालय से जुड़े सभी छोटे-बड़े लोगों ने उतकृष्टता की एक नई मूरत गढ़नी शुरु की जो आज हमें सफलता के उत्कृष्ट धरातल पर लेे आई है। आज हमारे पास छ।।ब् का ष्।श् ग्रेड पाने का श्रेय है, द्वितीय चरण में नैक के ग्रेड पाने के प्रयास के साथ यू0जी0सी0 द्वारा प्रदत्त ‘‘पोटेन्षियल फॉर एक्सीलेन्स‘‘ का दर्जा है, स्ववित्तीय पाठ्यक्रमों की सौगात है, इग्नू के साथ जुड़ कर पाई हुई सामुदायिक महाविद्यालय की उपलब्धि है और आगे लिए डिग्री ग्रान्टिंग कालेज का लक्ष्य है, हम जिसे हासिल कर लेने के आस-पास हैं, क्योंकि अब इस महाविद्यालय में शब्दों का जादू नहीं चलता, चापलूसियों की फसलें नहीं उगतीं, फर्जी ऑकड़ों से कागजों का पेट नहंीं भरा जाता। आज यह कालेज ठोस श्रम, एकाग्र चिंतन और समर्पण से प्राप्त उपलब्धियों का जीता जागता षिलालेख है, जिसकी सफलता सर चढ़कर बोलती है। आसमान आज इसकी गलियों से तारे बटोर रहा है और यह महाविद्यालय आसमान से अपनी धरती पर चॉंद उतार रहा है। हाथ की तो बात है, गलत हाथ में मणि भी कंकण हो जाती है और सही हाथ में लोहा पारस हो जाता है। ऐसे में निराला की ‘‘राम की शक्ति पूजा‘‘ की ये पंक्तियॉं कितनी सटीक बैठती हैं-
‘‘हे पुरुष सिंह , तुम भी यह शक्ति करो धारण
आराधन का दृढ़ आराधन से दो उत्तर,
तुम वरो विजय संयत प्राणों से प्राणोंपर,
रावण अषुद्ध होकर भी यदि कर सका त्रस्त,
तो निष्चय तुम हो सिद्ध करोगे उसे ध्वस्त‘‘

 

आज हमारे प्राध्यापकों और छात्र-छात्राओं में उत्कृष्टता के प्रति एक उत्साह है और एक ललक की कुछ नया असाधारण करना है। हमने सफलता का मोह नहीं पाला, गुणवत्ता की चाह पैदा की है। महाविद्यालय की वर्किंग फोर्सं हमारे प्राध्यापक नयी योजनाओं के लेआउट पर काम कर रहे हैं, उच्च षिक्षा विभाग के निर्देष के अनुरुप कल्पनाओं के चित्र में इन्द्रधनुषी रंग भरकर उन्हे जमीनी हकीकत में तब्दील कर रहे हैं। यह सब तभी संभव हुआ है जब परिसर को सप्रयास प्रत्यक्ष और निहित हिंसा से सफलता पूर्वक मुक्त रखने के प्रयास किये गये हैं। रचनाधर्मिता की बेल भी शांति की गंगा जल से फलती-फूलती है।

 

इस महाविद्यालय में एक नई पहल होने के साथ ही एक नये युग की शुरुआत भी हो रही है। महाविद्यालय संचार क्रांति के नये युग में पदार्पण कर चुका है और यहॉं आनलाइन प्रवेष, आनलाइन परीक्षा परिणाम, आनलाइन प्रवेष-पत्र, आनलाइन सेमेस्टर परीक्षा परिणाम, आनलाइन वेतन प्रक्रिया व आयकर व्यवस्था यहॉं दैनन्दिन व्यवहार में आ चुकी है। एम0 ए0 व एम0फिल0 के छात्रों के लिये सुविचारित, सुगठित व सुव्यवस्थित एकीकृत सेमीनार, शोध-पत्र वाचन व सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुत कर्त्ताओं को तत्काल पुरस्कार की व्यवस्थाएॅं शैक्षिक नवाचार के प्रत्यक्ष उदाहरण है।

 

अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जन-जातियों और पिछड़े वर्ग के छात्रों के लिये विष्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित परीक्षा पूर्व प्रषिक्षण हेतु विशेष कक्षाएॅं संचालित हो रही हैं जो गरीब लेकिन प्रतिभाषाली छात्रों को उनके सपनों का आकाष छूने का अवसर प्रदान करने की दिषा में सतत् प्रयत्नषील हैं। इन कक्षाओं हेतु आयोजित विषेष ओरिएण्टेषन कार्यक्रम भी शैक्षिक नवाचार की श्रेणी में आता है।

 

महाविद्यालय में इन्फोनेट व्यवस्था शुरु हो चुकी है जिससे शोधार्थी छात्र-छात्रायें व प्राध्यापकगण लगभग 3000 शोध जर्नल व 7000 पुस्तकों से इन्टरनेट के माध्यम से जुड़ सकते हैं। हमारे सभी विभाग मुख्य व संबंधित विषयों में पाठ्यक्रम डिजाइन कर रहे हैं, पुराने पाठ्यक्रम में नयी उपयोगी ज्ञान विधाओं का समावेष कर उन्हे अद्यतन कर रहे हैं, सतत् आन्तरिक मूल्यांकन, छात्र फीडबैक व षिक्षकों द्वारा स्वमूल्यांकन की प्रक्रिया व्यवहार का अंग बन चुकी है।

 

इस महाविद्यालय के उत्कृष्ट ट्रैक रिकार्ड के पीछे हमारे प्राध्यापकों का कठिनतम् श्रम है, एक वर्क कल्चर है, जो सुबह से देर शाम तक अपने-अपने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुये देखे जा सकते हैं। परिश्रम यहॉं मजबूरी नहीं स्वप्रेरित परम्परा का रुप ले चुका है। हमारी सफलता हमारे परिश्रम का फल है, छोटे-बड़े सब का आषीर्वाद है। इसे तलवार दिखाकर नहीं हासिल किया गया है।


Dr. Ramlala Shukla
Principal
Govt. T.R.S. College, Rewa (M.P.)

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